नोएडा: कोरोना वायरस को मात देकर घर लौटे तीन मरीज, सुनाई आपबीती

 


नोएडा: कोरोना वायरस को मात देकर घर लौटे तीन मरीज, सुनाई आपबीती


देश में कोरोना वायरस लगातार पैर पसार रहा है, अबतक संक्रमण के लगभग 700 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 20 मरीजों की मौत हो चुकी है। अच्छी बात यह है कि इनमें से 42 मरीज कोरोना से जंग जीत कर घर पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। 
 

इस भयंकर महामारी से मरीजों को निजात दिलाने में जितना डॉक्टरों का सहयोग रहा है उतना ही बड़ा योगदान मरीजों का भी है। कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होकर घर आए दिल्ली एनसीआर के कुछ लोगों ने अमर उजाला के साथ अपनी कहानी साझा की। आइए पढ़ते हैं कि कोरोना को हराने में किसने कैसे पाई सफलता-

जिम्स में कोरोना से जिंदगी की जंग जीते तीन मरीज 
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में कोरोना पॉजिटिव भर्ती 10 मरीजों में 3 मरीज ठीक हो गए हैं। इनमें बुधवार को एक और गुरुवार को दो मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। तीनों मरीज अभी 14 दिनों तक अपने घर में आइसोलेशन (एकांतवास) में रहेंगे। 

गुरुवार को जिम्स में हुई प्रेसवार्ता में निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने यह जानकारी दी। जिम्स निदेशक ने बताया कि तीनों मरीज सबसे पहले आए थे। इनमें से दो लोग पहले स्टेज में, जबकि एक मरीज दूसरे स्टेज में थे। पढ़ें जिम्स से घर लौटे तीनों मरीज क्या कहते हैं इस बारे में-


 



डर तो लगा था पर धैर्य और साहस से कोरोना से हुए पार: पहली मरीज
‘मैं जिम्स में भर्ती थी। 17 मार्च को जब रिपोर्ट आई तो डर गई थी। खुद एमबीबीएस छात्रा होने और अस्पताल के डॉक्टरों के मानसिक रूप से मिले सपोर्ट देने के कारण डर पर काबू पा लिया। आज कोरोना संक्रमण से मिली जीत पर बेहद खुश हूं।’ गुरुवार को अस्पताल से रिलीव होते समय यह बातें ग्रेटर नोएडा की महिला मरीज ने कहीं। 

अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह सेक्टर-100 में रहती हैं और एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। उनका 12 दिनों का यूरोप टूर था। 10 से 12 मार्च के दौरान वह फ्रांस में थीं। अनुमान है कि यूरोप टूर में ही वह कोरोना से संक्रमित हो गईं। 

हालांकि, उनके साथ गए लोगों में कोई संक्रमित नहीं मिला है। कोरोना महामारी की भयावहता के चलते वह 12 मार्च को भारत आ गईं। दिल्ली एयरपोर्ट पर क्वारंटीन होने की गाइडलाइन का पालन करते हुए घर आ गईं। 15 मार्च को उन्हें गले में थोड़ी दिक्कत महसूस होने पर उन्होंने प्रशासन से संपर्क किया और जिम्स आकर अपनी जांच कराई। 

वह राजकीय आयुर्विज्ञान में पहली मरीज थीं जिन्हें 15 मार्च को भर्ती कर लिया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने लक्षण के आधार पर दवा शुरू कर दी। 17 मार्च को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पहले तो वह थोड़ा घबरा गईं। 

उन्होंने डॉक्टरों और स्टॉफ की तारीफ करते हुए कहा कि पूरे स्टॉफ ने उन्हें निराश नहीं होने और खुश रहने के लिए कहा। डॉक्टरों ने उन्हें जल्द ठीक होने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि 15 मार्च से 26 मार्च के दौरान उन्होंने टीवी देखकर, मोबाइल गेम खेलकर और किताबें पढ़कर समय व्यतीत किया। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के लोगों को इस बीमारी में गाइडलाइन अपनाने की सलाह दी है। इनकी बात माननी चाहिए। यदि यह बीमारी हो भी जाती है तो इसमें घबराने की बात नहीं है। कुछ दिन दवा चलने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है।



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